प्राकृतिक सौन्दर्य साधन :और लाभ
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सबसे शुद्ध पिने के पानी वाला देश (sabse sudhh pani wala desh )
दुनिया का सबसे शुद्ध पिने के पानी वाले देशों में स्विर्ज़लैंड पहले स्थान में आता है इन देशों में क्रमशः निम्नलिखित देश शामिल है
*स्विर्ज़ेरलैंड, जर्मनी, कनाडा, आइसलैंड,स्वीडेन, फिनलैंड , डेनमार्क,नोरवे, यू के, ग्रीनलैंड, इटली, आदि प्रमुख रूप से आते है
पानी की गुणवत्ता की जाँच कैसे की जाती है? (Pani ki sudhhata ko kaise parkha jata hai?)
अलग अलग देशों में पानी की गुणवत्ता को निर्धारण करने के लिए अपनी अपनी सस्थाएं होती है और उनके मानक दूसरे देशों से भिन्न होते है अमेरिका में पानी की गुणवत्ता इ पी ए (the us environment protection agency, EPA) द्वारा निर्धारित होता है और भारत में पानी की शुद्धता मापन (the central pollution control board, CPBC) द्वारा होता है, इस तरह यह कार्य स्विट्ज़रलैंड में उनकी अपनी संस्था है।
पानी की गुणवत्ता की जाँच मुख्य रूप से तीन बातों पे आधारित होता है भौतिक कारक, रासायनिक कारक, तथा जैविक कारक।
भौतिक मापदंड
पानी के गुणवत्ता की भौतिक मापदंड के अनतर्गत पानी के रंग, गंध, स्वाद,तापमान, टर्बोडिटी, सॉलिड (TSS) टोटल ससपेंडेड सॉलिड आदि संकेत आते है।
•टर्बोडिटी - जल में मौजूद धुंधले पन को दर्शाता है यह दर्शाता है की पानी कितना धूमिल है यह जानने के लिए टर्बोडिटी सेंसर का उपयोग किया जाता है इस उपकरण में प्रकाश को पानी से गुजरने की क्षमता को मापने के लिए किया जाता है जिसमे इस क्रिया को ntu(nephelometic tuberdity units ) कहा जाता है 5 से अधिक ntu जल में मौजूद मैले पन को दर्शाता है अर्थात टर्बोडिटी सेंसर का स्तर 5 ntu से अधिक हो तो पानी में मैलापन मौजूद है और पिने के जल का ntu 1 से निचे हो तो इसलिए जल को आदर्श मना जाता है
•तापमान -पानी का तापमान उसके गुणवत्ता से जुड़े कई पहलुओं को प्रभावित करता है जैसे रासायनिक प्रतिक्रिया,घुलनशीलता, जैबिक ऑक्सीजन की मांग, अवसादन, क्लोरिनिकरण आदि जल के तापमान पर ही निर्भर करते है। आदर्श जल का तापमान 50-60 डिग्री फरेनहाईट होता है।
•रंग -शुद्ध जल का कोई रंग नहीं होता है यह रंग हीन तथा पारदर्शी होता है। कई बार कार्बनिक तथा जैविक पदार्थों के क्षय होकर जल में मिलने के कारण जल के रंग में परिबर्तन होता है
•गंध तथा स्वाद -कई बार घुलन शील गैस, कार्बनिक तथा जैविक संयोजक तत्वों, का जल में मिलना जल के गंध और स्वाद को प्रभावित करता है मुख्यतः इनका स्रोत क़ृषि तथा घरेलु उपयोग में आने वाली चीज़े शुद्ध जल गंध तथा स्वादहीन होता है
•कठोरपन - जल के कठोरपन का मापन TDS(total dissolve solid)से होता है जब हम पानी के सैंपल को फाइबर फ़िल्टर में डालते है तो पानी में मौजूद ठोस कण फ़िल्टर के शीर्ष पर ही रहेंगे और दूसरी तरफ पानी में घुला हुआ ठोस पानी से होकर गुजरेगा और पानी में ही रहेगा इस तरह हम पानी के ठोस पन की मात्रा को माप कर उसमे मौजूद कार्बनिक पदार्थ कितना मौजूद है पता लगा सकते है कुल घुलित ठोस पदार्थो के लिए अलग अलग मात्रा ओं का वर्गीकरण किया गया है।
जैसे
मीठा पानी -1,500mg/l TDS से कम
खारा जल -1,500mg/l TDS से अधिक
रासायनिक संकेतक
जल के गुणवत्ता के रासायनिक संकेतो में,पी एच (pH), पानी में मौजूदअम्लता,क्षार, क्लोरिन, जल का ठोसपन, घुलनशील ऑक्सीजन आदि।
•PH मानक -पानी का पिएच सेंसर परिक्षण किट द्वारा मापा जाता है ph मानक बताता है की पानी कितना अम्लीय या क्षारीय है ph का स्तर 0-से 14 के बिच होता है जिसमे 7.0 की रीडिंग जल का न्यूट्रलहोने का संकेत करती है जबकि रीडिंग 7.0 से निचे का मापन अम्लीयता को दर्शाता है और 7.0से ऊपर की रीडिंग जल के क्षारीयता का सूचक है अगर पानी का ph 6.5से 8.0 तक हो तो जल को पिने के लिए सुरक्षित मना जाता है
•अम्लीयता - अम्लता के मुख्य कारण खनिज, हाइड्रोलाइस्ड लवण, और कार्बनडाई ऑक्साइड तथा कुछ जैविक अवयव का पानी में मौजूद होना हो सकता है पानी की अम्लता को ph सेंसर की मदद से मापा जाता है
•क्षारीयता _ ph सेंसर द्वारा पानी की क्षारीयता का मापन होता है यदि पानी अत्यधिक क्षारिय है तो ये इस बात की पुस्टि करता है की जल में चुना पत्थर, फॉस्पेट बोरेट्स की मात्रा की अधिकता
• घुलित ऑक्सीजन - यह मापन प्रक्रिया नदियों, झीलों, तथा झरनों में प्रदुषण की मात्रा को निर्धारित करने में मदद करता है इलेक्ट्रॉमेटिक विधि द्वारा जल में मौजूद घुलन शील ऑक्सीजन का मापन किया जाता है
•क्लोरिन- क्लोरिन प्राकृतिक रूप से पानी में नहीं पाया जाता है। इसका प्रयोग जल में कीटाणु शोधन के लिया अतीरिक्त रूप से होता है स्वयं में जहरीली गैस होने के वावजूद इसकी निश्चित मात्रा मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होती है पिने के पानी में इसकी आदर्श मात्रा 02mg/l है
जैबिक संकेतक
जल की गुणवत्ता मापन के लिए जैबिक संकेतको में, जल में मौजूद वायरस, बैक्टीरिया, शैवाल आदि होते है
•बैक्टीरिया _ बैक्टीरिया एक कोशिय जीव है जो उचित तापमान, पानी के ph, और खाद्य आपूर्ति अनुकूल होने पर तेजी से अपनी प्रजनन कर सकते है पानी के नमूनों में बैक्टीरिया की संख्या का आकलन लगाना असंभव है। जल में उच्च मात्रा में बैक्टीरिया कई हानिकारक रोगों का कारण बनता है, जिनमे. अतिसार, हैजा, टायफायड आदि।
•शैवाल _ यह अति शुक्ष्म पौधे है ये प्रकाश संश्लेषक प्रकिया द्वारा अपने भोजन का निर्माण करते है और फ़ैलते है शैवाल कार्बन ड़ाई ऑक्साइड का उपभोग करते है और ऑक्सीजन छोड़ते है कई प्रकार के जल जिनो जमा किया गया हो याफिर तलाब आदि में विशिष्ट जल उपचार विधि में इसका उपयोग किया जाता है हालांकि इसकी कई प्रजातियां सार्वजनिक गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न करती है जिनमे नीले हरे शैवाल आदि आते है
•वायरस -वायरस अति शुक्ष्म जैविक संरचनाएँ है जो मानवता स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है ये परजीवी होते है और इनकी शुक्ष्मता के कारण ये अधिकांश फ़िल्टर से गुजरने में शक्षम होते है। कुछ जलजनित वायरस जैसे हेपाटायटीस और भी कई इसी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओ का कारण बन सकती है। अतः हमें जल उपचार प्रक्रिया में पूर्ण रूप से विषाणुओं को समाप्त करने में सक्षम होना चाहिये
धन्यवाद
very nice informating
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