प्राकृतिक सौन्दर्य साधन :और लाभ
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डायबीटीज क्या है?
शरीर को अपनी गतिविधियों को संचालित करने के लिए ऊर्जा की आबस्यकता होती है जिसकी परिपूर्ति भोजन से होती है भोजन मे मौजूद प्रोटीन, फैट्स, और कार्बह्यडराट आदि के माध्यम से शरीर को ऊर्जा मिलती है इसमे भी शर्करा (ग्लूकोज )मुख्य है जो कार्बह्यडरट का एक अवयव है जो मुख्यतः चावल, आलू,दूध और दूध से बने परिकारों तथा मीठे पदार्थ, और फल, शर्करा (ग्लूकोज )के प्रमुख साधन है हमारे द्वारा किये गए भोजन मे मौजूद शर्करा जब रक्त मे पहुँचता है तभी रक्त उसे शरीर के बिभिन्न हिस्सों मे पहुंचाता है रक्त मे शर्करा की मात्रा बढ़ने पर अगनाश्य द्वारा इन्सुलिन नामक हार्मोन उत्सर्जित होता है जो रक्तकोशिकाओ मे शर्करा को प्रबेश कराने का काम करती है भोजन न मिलने की अबस्था मे लिबर अपने अंदर संग्रहित वसा (फैट )को शर्करा मे परिबर्तित कर के रक्त मे शर्करा के स्तर को बनाये रखने मे मदद करता है जिसमे भोजन नहीं रहने पर भी मांसपेशीओ को निरंतर ग्लूकोज की पर्याप्त मात्रा पहुँचती रहे। इस प्रकार रक्त मे शुगर का स्तर एक निश्चित सीमा मे ऊपर निचे होता रहता है जब यह इन्सुलिन कभी सामान्य रूप मे नहीं बनने पर मात्रा से अधिक कम होने पर रक्त मे सुगर की मात्रा बढ़ने लगती है और इसी स्थिति को डायबेटीज, या मधुमेहकी बीमारी कहते है
डायबेटीज के प्रकार
डायबेटीज दो प्रकार की होती है
1• टाइप 1डायबेटीज (type 1diebetes)
2•टाइप 2डायबेटीज (type 2diebetes)
1 टाइप 1डायबेटीज, वह डायबेटीज है जिसमे अग्नाशय मे इन्सुलिन का बनना कम हो जाता है या फिर इन्सुलिन बनना ही बंद हो जाता है
2 टाइप 2डायबेटीज पुरानी बीमारियों है जिसमे रक्त शर्करा का स्तर उच्च होता है जिसमे कई स्वास्थ्य समस्याएं होती है दृष्टि सम्बंधित समस्याएं भूख प्यास का बढ़ना वजन का गिरना आदि
डायबेटीज के लक्षण
थकान व सुस्ती महशुस करना
हमेशा भूख लगी रहना
अधिक प्यास लगना
बार बार पेशाब आना ख़ासकर रात में
बिना किसी कारण शरीर का वजन काम होना
सिरदर्द होना
चक्कर आना
चिड़चिड़ा पन होना
डायबेटीज क्यूँ होता है?
जैसा की डायबेटीज की बीमारी में इन्सुलिन के असंतुलन और गड़बड़ी मुख्य कारक है, आइये आज जानते है इन्सुलिन क्यों अनियंत्रित होता है इन्सुलिन का अपर्याप्त मात्रा में बनने का कारण रक्त में वसा (cholestrol) की मात्रा में वृद्धि होना है और रक्त में वसा की मात्रा में वृद्धि भोजन का अत्यधिक वसा युक्त होना तले भुने चीज़ो का इस्तेमाल करना मदिरा और मांस का उपयोग शारीरिक परिश्रम नहीं होना खून में कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है जो इन्सुलिन को आलसी बनाने का काम करता है जिसका मुख्य परिणाम डायबेटीज होता है
डायबेटीज के रोगियों का भोजन कैसा होना चाहिए
मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए हमें अपने भोजन में विशेष ध्यान देना जरुरी होता है मधुमेह के रोगियों के लिए भोजन में 60प्रतिशत कार्बॉहाईडरेट 20% फैट तथा 20% प्रोटीन होना चाहिए अपने उम्र के अनुसार भोजन में निश्चित कॅलोरी की मात्र होनी चाहिए
मधुमेह रोगियों का आहार तालिका
सुबह उठकर एक गिलास गुनगुना पानी पिए। या फिर रात को एक चम्मच मेथी एक गिलास पानी में भिगोकर रखें हुए पानी को पीकर मेथी को चबा कर खाना चाहिये
नाश्ते में एक कटोरी अंकुरित अनाज कुछ दलिया, दही आदि ले सकते है, बिना मलाई वाले दूध की चाय सुगरफ्री क साथ ले सकते है
दोपहर में भोजन से पहले कच्चे फल तथा सब्जियों को खाना चाहिए जैसे अमरुद, पपीता सेब संतरे आदि, भोजन में थोड़ा चावल दो रोटी एक कटोरी दाल, एक काटोरी सब्जि तथा सलाद एवं छाछ का उपयोग करना चाहिये
शाम को नास्ते में बिना चीनी की चाय के साथ कुछ सुगरफ्री बिस्कुट और ब्राउन ब्रेड का प्रयोग कर सकते है
रात को भोजन हल्का ले दो रोटी और एक कटोरी सब्जि
मधुमेह रोगियों को ज्यादा फाइबर युक्त भोजन करना चाहिये छिलके युक्त गेहूं का आटा, भूरा चावल ब्राउन राइस जिसे पोलिश नहीं किया गया हो. सब्जियों में करेला, मेथी, सहजन, पालक, प्रबल, लौकी, काला चना, ब्रोकली उपयुक्त होते है
फलों में जामुन मधुमेह रोगियों के लिए अमृत समान है
मधुमेह रोगियों को चिकित्सक से परामर्श करते रहना चाहिए आहार और जीवन शैली में परिबर्तन करके हम इसलिए रोग से मुक्ति हो सकते है
मधुमेह का संक्षिप्त इतिहास
आधुनिक इतिहास में मधुमेह का पहला मामला 1550बचा मिश्र (Egypt) मे मिला था रोगी को बार बार पेशाब आने की समस्या को इस रोग का पहला लक्षण बताया गया
परंतु भारतीय ऋषि मुनियो को इसके बारे में पूर्व ज्ञान था आयुर्वेद के प्रमुख संहिता ऋषि चरक द्वारा लिखें ग्रन्थ चरक सहिता में इसका उल्लेख मिलता है मधुमेह को डायबेटीज का नाम ग्रीक फिजिशियन अपोलोनियस ऑफ मेमफीज़ द्वारा दिया गया है ग्रीक भाषा में डायबिटीज का अर्थ गुजरना होता है
very nice information
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